Wednesday, 27 December 2017

तारापीठ : माँ काली का एक शक्तिपीठ

माँ तारा मंदिर की ऐतिहासिकता एवं महत्व - प० बंगाल के वीरभूम जिले में तारापीठ में माँ तारा का विश्वप्रसिद्ध मंदिर है. माँ तारा का यह मंदिर भारत का एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है. ऐसी मान्यता है कि जब देवी सती अपने आपको को यज्ञ की अग्नि में जला डाला तब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर आकाश मार्ग में विचरण कर रहे थे. उसी दौरान देवी सती के नयन इसी स्थान पर गिरा था, जहाँ आज माँ तारा का मंदिर स्थापित है. मान्यता है कि माँ तारा केदर्शन करने और वहां मनोकामना का धागा बाँधने पर भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है.


तारापीठ मंदिर कैसे पहुंचे - तारापीठ मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन रामपुरहाट रेलवे स्टेशन है. उस स्टेशन के मात्र 5 किलोमीटर की दुरी पर ही तारापीठ मंदिर है. स्टेशन से मंदिर जाने के लिए ऑटो रिक्शा, टैक्सी आदि की सुविधा रहती है जो चौबीसों घंटे उपलब्द्ध रहते हैं. रामपुरहाट रेलवे स्टेशन  के लिए  दिल्ली, लखनऊ , वाराणसी, पटना, भागलपुर , कोलकाता, मुंबई, नागपुर, बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़ आदि बड़े शहरों से सीधी रेल सेवा उपलब्द्ध है.  हावड़ा स्टेशन (कोलकोता) से रामपुरहाट स्टेशन की दुरी 207 किलोमीटर है. कोलकाता से हर दिन कई सारी रेलगाडी  रामपुरहाट के लिए चलती हैं. बनारस और मुगलसराय से भी रामपुरहाट के लिए रोजाना ट्रेन उपलब्द्ध हैं. गुवाहाटी से भी रामपुरहाट जाने के लिए रोजाना ट्रेन उपलब्द्ध है. रांची और गया से भी रामपुरहाट जाने के लिए प्रत्येक दिन ट्रेन मौजूद है. 
तारापीठ से निकटतम हवाई अड्डा कोलकाता है. कोलकाता से आप रेल से रामपुरहाट या टैक्सी से सीधे तारापीठ पहुँच सकते हैं.


 
तारापीठ में माँ तारा के दर्शन कैसे करें - माँ तारा के मंदिर का पट सुबह के 4 बजे खुलता है. किन्तु इस वक़्त सिर्फ उन्ही श्रद्धालुओं को दर्शन का मौक़ा मिलता है जो विशेष कूपन लेते हैं. ये विशेष टिकट मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही मिलता है. इस कूपन या टिकट की कीमत प्रति श्रद्धालू 200 रूपये है,, जो काउंटर पर कभी भी ले सकते हैं. VIP टिकट लेने पर बहुत जल्द ही दर्शन हो जाते हैं व मंदिर के अन्दर माँ तारा की पूजा आराम से कर सकते हैं. यह रकम मंदिर के ट्रस्ट को जाती है जिससे मंदिर के विकास एवं संचाल का कार्य होता है. 
सामान्य श्रद्धालुओं अर्थात बिना टिकट वाले भक्तों के लिए भी प्रातः 4 बजे से ही कतार लगनी शुरू हो जाती है, लेकिन उनके लिए दरवाजा प्रातः 7.30 बजे खुलता है. तब तक भक्तों को कतार में लग कर अपनी बारी का इन्तजार करना पड़ता है. शनिवार और रविवार को छोडकर बांकी दिन कतार ज्यादा लम्बी नहीं रहती है. 4 से 5 घंटे तक कतार में लगने के बाद प्रायः सभी भक्त माँ तारा के दर्शन कर लेते हैं. 
मंदिर के ठीक आसपास ही कई दूकान हैं जहाँ आप फुल, मेवे प्रसाद आदि ले सकते हैं. कई दूकान में प्रसाद की टोकरी के भाव अलग अलग होते हैं. प्रायः 50 रूपये से प्रसाद पैकेट की शुरुआत होती है.  प्रसाद में पेड़ा, इलायची दाना और फुल, बेलपत्र आदि रहता रहता है. अधिक कीमत वाले प्रसाद के पैकेट में प्रसाद की मात्रा अधिक रहती है. वैसे आप अपनी इच्छानुसार अलग अलग प्रसाद भी ले सकते हैं, जिसमे आपको बचत होगी. मंदिर में माँ तारा के दर्शन करने के बाद वहां परिसर में ही घाट है. उसके भी दर्शन कर लें. 
मंदिर के ठीक बगल में घाट है जहाँ देवी माँ के पैर हैं. उसके भी दर्शन कर लें.


तारापीठ में कहाँ रुके - तारापीठ मंदिर के आसपास 2 वर्ग किलोमीटर में सैकड़ों की संख्या में होटल हैं.  मुख्य सड़क पर अवस्थित होटल महंगे (1000- 1200 रूपये प्रति रात ) हैं. कुछ होटल गलियों में हैं जो कम कीमतों में उपलब्द्ध हैं. शनिवार और रविवार को तारापीठ में भक्तों की अत्याधिक भीड़ रहती है. बांकी दिन में कम भीड़ रहती है. होटल में डबल बेड और उससे अधिक 4 बेड वाले कमरे भी उपलब्द्ध रहते हैं. कुछ होटलों में स्विमिंग पूल की भी सुविधा है. प्रायः सभी होटलों में चेक आउट का समय लगभग दिन के 12 बजे है. अर्थात यदि आप दिन के 12 बजे के बाद भी होटल  में रुकते हैं तो आपको पुरे दिन का चार्ज लग जायेगा. अगर आप होटल वाले से बात करें तो कुछ एक्स्ट्रा पैसे लेकर आपको 3 से 4 बजे तक भी रुकने की अनुमति दे सकते हैं. 

भोजन की व्यवस्था - तारापीठ में मंदिर के आसपास कई सारे रेस्टुरेंट हैं जहां आप सुबह से ले कर रात तक नाश्ता, खाना खा सकते हैं. शुद्ध शाकाहारी रेस्टुरेंट की संख्या कम हैं. अधिकाँश मांसाहारी होटल हैं, जिसमे आप मछली, चिकन, या मटन वाला खाना खा सकते हैं. ऐसे रेसुरेंटो में भी आप शाकाहारी भोजन पा सकते हैं. कई रेस्टुरेंट में 50 रूपये में भरपेट शाकाहारी  थाली का भी सिस्टम है.
अगर आप के पास समय है तो आप मांस खरीद कर किसी छोटे से रेस्टुरेंट में खुद भी पकवा सकते हैं. इसमें आपको पैसे की बचत तो होगी ही साथ हे अपने अनुसार तेल मसाले वाला नॉनवेज बनवा सकते हैं.
वैसे आप जिस होटल में ठहरे हैं वहां भी भोजन की व्यवस्था रहती है, लेकिन वो बाहर से काफी महंगी रहती है. 

अन्य दर्शनीय स्थल - माँ तारा के मंदिर के अलावा भी वहां कुछ दर्शनीय स्थल हैं. यदि आपके पास पर्याप्त समय है तो आप वहां जा सकते हैं. माँ तारा मंदिर से आधा किलोमीटर पश्चिम दिशा  में 'भारत सेवा श्रम संघ' का मंदिर है. ये काफी सुन्दर है. आप यहाँ जरुर जाएँ.  
इसके अलावा भी कुछ दूर पर घुमने लायक जगह है जो आप वहां से ऑटो या ई रिक्शा रिजर्व कर के जा कर घूम कर वापस आ सकते हैं.

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